भारतीय ध्वज तिरंगे में बिहारी भूमिका, अशोक चक्र के रूप में..
भारत के इतिहास के पन्नों को पलटो तो मिलेगा सुनहरे अक्षर में लिखा हुआ गौरवशाली इतिहास बिहार की भूमि से.. बिहार तो वैसे भी अपने स्वर्ण इतिहास के लिए विश्व विख्यात है आईये जानते है गड़तंत्र दिवस के मौके पर बिहार के लाल सम्राट अशोक की भारत और भारतीय ध्वज को और भी ख़ाश बनाने में ख़ाश और महत्वपूर्ण भागीदारी..!
बिहार की राजधानी पटना इतिहास में पुरे भारत की राजधानी हुआ करता था, उस समय पटना को पाटलिपुत्रा नाम से जाना जाता था, पाटलिपुत्र के राजा सम्राट अशोक भारत के सभी प्रांतों साथ साथ दूसरे भी देशों के विजेता थे, कलिंग युद्ध में अपने मान सम्मान के लिए जित कर भी हार मानने वाला महान सम्राट अशोक आज भी भारत और बिहार की शान है ।
सम्राट अशोक ( बिहार के शान)
रोजमर्रा की जिंदगी में भारतीय मुद्रा पर आप सम्राट अशोक के सिंह स्तम्भ पर बखूबी देख सकते हैं । ठीक इसी प्रकार आईये जानते हैं बिहार की भूमि के सम्राट अशोक किस तरह हमारे भारतीय ध्वज तिरंगे के साथ लहरा रहे हैं और देश को एक अनोखा सन्देश दे रहे हैं..
तिरंगा ( भारत का राष्ट्रिय ध्वज )
बिहार के शान की पहचान अशोक चक्र ( अशोक चक्र और 24 तिलीयाँ)
अशोक स्तंभ
अशोक चक्र सम्राट अशोक के द्वारा बनवाये गए अशोक स्तम्भ (सारनाथ उत्तर प्रदेश) से लिया गया है, बिहार के महान सम्राट अशोक द्वारा 250 ईसा पूर्व में बौद्ध धर्म अपनाने के उपरांत बौद्ध प्रचार के लिए सारनाथ यात्रा किए, अशोक के काल में प्रचार शिलालेख लिपि तथा स्तंभों द्वारा हुआ करती थी..
यह स्तम्भ दुनिया भर में प्रसिद्ध है, इसे अशोक स्तम्भ के नाम से भी जाना जाता है।
इस स्तम्भ में चार शेर एक दूसरे से पीठ से पीठ सटा कर बैठे हुए है।
यह स्तम्भ सारनाथ के संग्रहालय में रखा हुआ है।
भारत ने इस स्तम्भ को अपने राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया है तथा स्तम्भ के निचले भाग पर स्थित अशोक चक्र को तिरंगे के मध्य में रखा है ।
अशोक चक्र
हिन्दू धर्म के अनुसार, पुराणों में 24 संख्या बहुत महत्व रखता है। अशोक चक्र को धर्म चक्र माना जाता है जो कि समय चक्र भी कहलाता है। अशोक चक्र के बीच में 24 तिलीयाँ है जो पूरे दिन के 24 बहुमूल्य घंटों को दिखाता है। ये हिन्दू धर्म के 24 धर्म ऋषियों को भी प्रदर्शित करता है जो “गायत्री मंत्र” की पूरी शक्ति को रखता है (हिन्दू धर्म का सबसे शक्तिशाली मंत्र)। हिमालय के सभी 24 धर्म ऋषियों को 24 अक्षरों के अविनाशी गायत्री मंत्र के साथ प्रदर्शित किया जाता है (पहला अक्षर विश्वामित्र जी के बारे वर्णन करता है वहीं अंतिम अक्षर यज्ञवल्क्या को जिन्होंने धर्म पर शासन किया)।
भारतीय झंडे के मध्य में अशोक चक्र होने के पीछे भी एक बड़ा इतिहास है। बहुत साल पहले, भगवान बुद्ध को मोक्ष की प्राप्ति हुई अर्थात गया में शिक्षा मिली। मोक्ष की प्राप्ति के बाद वो वाराणसी के सारनाथ आ गये जहाँ वो अपने पाँच अनुयायी (अर्थात् पाँच वर्जीय भिक्क्षु) कौनदिन्या, अश्वजीत, भद्रक, महानाम और कश्यप से मिले।
भगवन बुध
धर्मचक्र की व्याख्या और वितरण कर बुद्ध ने उन सबको अपना पहला उपदेश दिया। इसे राजा अशोक द्वारा अपने स्तंभ के शिखर को प्रदर्शित करने के लिये लिया गया जो बाद में भारतीय ध्वज के केन्द्र में अशोक चक्र के रुप में इस चक्र के उत्पत्ति का आधार बना। राष्ट्रीय झंडे के बीच में अशोक चक्र की मौजूदगी राष्ट्र में मजबूत संबंध और बुद्ध में विश्वास को दिखाता है।
12 तिलीयाँ भगवान बुद्ध के अध्यापन को बताता है जबकि दूसरी 12 तिलीयाँ अपने बराबर की प्रतीकों के साथ जोड़ें में है जैसे-अविध्या (अर्थात् ज्ञान की कमी), सम्सकारा (अर्थात् आकार देने वाला), विजनाना (अर्थात् चेतना), नमरुपा (अर्थात् नाम और रुप), सदायातना ( अर्थात् छ: इन्द्रिय जैसे- कान, आँख, जीभ, नाक, शरीर और दिमाग), स्पर्श (अर्थात् संपर्क), वेदना ( अर्थात् दर्द), तृष्णा (अर्थात् प्यास), उपदना (अर्थात् समझना), भाव (अर्थात् आने वाला), जाति (अर्थात् पैदा होना), जरामरना (अर्थात् वृद्धावस्था), और मृत्यु।
अशोक चक्र के बाद आईये जानते हैं तिरंगे में रंगों की महत्ता
केसरिया रंग
राष्ट्रीय ध्वज का सबसे ऊपरी भाग केसरिया रंग है; जो बलिदान का प्रतीक है राष्ट्र के प्रति हिम्मत और नि:स्वार्थ भावना को दिखाता है। ये बेहद आम और हिन्दू, बौद्ध और जैन जैसे धर्मों के लिये धार्मिक महत्व का रंग है। केसरिया रंग विभिन्न धर्मों से संबंधित लोगों के अहंकार से मुक्ति और त्याग को इंगित करता है और लोगों को एकजुट बनाता है। केसरिया का अपना अलग महत्व है जो हमारे राजनीतिक नेतृत्व को याद दिलाता है कि उनकी ही तरह हमें भी किसी व्यक्तिगत लाभ की इच्छा के पूरे समर्पण के साथ राष्ट्र की भलाई के लिये काम करना चाहिये।
सफेद रंग
राष्ट्रीय ध्वज के बीच का भाग सफेद रंग से डिज़ाइन किया गया है जो राष्ट्र की शांति, शुद्धता और ईमानदारी को प्रदर्शित करता है। भारतीय दर्शन शास्त्र के मुताबिक, सफेद रंग स्वच्छता और ज्ञान को भी दर्शाता है। राष्ट्र के मार्गदर्शन के लिये सच्चाई की राह पर ये रोशनी बिखेरता है। शांति की स्थिति को कायम रखने के दौरान मुख्य राष्ट्रीय उद्देश्य की प्राप्ति के लिये देश के नेतृत्व के लिये भारतीय राजनीतिक नेताओं का ये स्मरण कराता है।
हरा रंग
तिरंगे के सबसे निचले भाग में हरा रंग है जो विश्वास, उर्वरता ; खुशहाली ,समृद्धि और प्रगति को इंगित करता है। भारतीय दर्शनशास्त्र के अनुसार, हरा रंग उत्सवी और दृढ़ता का रंग है जो जीवन और खुशी को दिखाता है। ये पूरे भारत की धरती पर हरियाली को दिखाता है। ये भारत के राजनीतिक नेताओं को याद दिलाता है कि उन्हें भारत की मिट्टी की बाहरी और आंतरिक दुश्मनों से सुरक्षा करनी है।
जय हिन्द जय बिहार
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