बिहार जहाँ की आबोहवा से बुद्ध के ज्ञान की खुशबू आती है, बिहार जहाँ की पावन माटी ने गुरुगोबिंद सिंह जैसे वीरों को जन्म दिया है ! अशोक जैसा महान शासक,चाणक्य जैसा नीतिवान और महावीर जैसे दार्शनिकों की कर्मस्थली रहा है बिहार ! बिहार के महान बेटों ने भारतवर्ष की शरहदों से बाहर जाकर सनातन धर्म की,और लोकतंत्र की स्थापना की है ! लुटियंस पेश करते है “भारतवर्ष का गौरव,बिहार का स्वर्णिम इतिहास”

Sunday, 31 January 2016

सोन भंडार गुफा ,राजगीर [बिहार]

सोन भंडार गुफा ,राजगीर [बिहार]

  
राजगीर बिहार में एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल है,प्रकृति की सुन्दरता यहाँ देखते बनती है पांच तरफ से पहाड़ियों से घिरे इस क्षेत्र से बानगंगा बहती है .
कभी यहाँ  वैभवशाली महानगर हुआ करता था आज वहां एक छोटा गाँव भर है.राजगीर अपनी गुफाओं,किलों,बोद्ध और जैन मंदिरों के लिए जाना जाता है.वेणु विहार एक बहुत ही खूबसूरत स्थल है जिसे भगवान बुद्ध  को उस समय के राजा बिम्बीसार ने भेंट में दिया था.यहीं जापानी बुद्ध संघ ने विश्व शान्ति स्तूप भी बनवाया हुआ है.

हाल ही में उत्तर प्रदेश में स्वर्ण भण्डार के होने की चर्चाएँ खूब हुईं थीं खुदाए भी हुई और अब भी दावा किया जा रहा है की किसी अन्य स्थान पर भी भंडार हो सकता है,मैं नहीं जानित कितनी सच्चाई उन बातों में है लेकिन एक ऐसे खजाने के बारे में आज बताने जा रही हूँ जो बिहार की  एक गुफा में आज तक बंद है.यह स्थान नालंदा से कोई १२-१३ किलोमीटर दूर है.

 
सोन भण्डार गुफा किसी समय यह भिक्षुओं के रहने का उत्कृष्ट और भव्य स्थान हुआ करता था.
इस गुफा का ऐतिहासिक और पुरातत्व महत्व है.यह बिहार आने वाले पर्यटकों में लोकप्रिय है. 
निर्माण काल [तीसरी या चौथी सदी?] निश्चित नहीं है. 

सोन भण्डार गुफा  ,राजगीर [बिहार] 

बिहार राज्य के बारे में विस्तार से आप पहले की पोस्ट में पढ़ चुके हैं.आज इसी राज्य के राजगीर लिए चलते हैं.यह क्षेत्र नालंदा जिले में स्थित है और इस का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी है.यहाँ भगवान्  बुद्ध ने कई साल बिताए थे. 

यह मगध की राजधानी थी और उस समय इस का नाम राजगृह था. यहीं पर भीम ने जरासंध का वध किया था.यहाँ के मकर और मलमास मेले भी बहुत प्रसिद्ध हैं. 

अग्नि पुराण एवं वायु पुराण आदि के अनुसार इस मलमास अवधि में सभी देवी देवता यहां आकर वास करते हैं. 
वैभर गिरी पहाड़ी के दक्षिण में बनी इस गुफा में दो कमरे हैं,एक मत अनुसार ये दो गुफाएं हैं.हम इन्हें एक गुफा के दो कमरे समझते हुए विवरण दे रहे हैं.ये दोनों कमरे पत्थर की एक चट्टान से बंद हैं. 

पहला कमरा सुरक्षा कर्मियों /गार्ड का कमरा माना जाता है.दूसरे कमरे में स्वर्ण भडार है जो की कुछ लोगों द्वारा राजा बिम्बिसार का खजाना बताया जाता है. 

अजातशत्रु के पिता बिम्बिसार की जेल के अवशेष पास ही मिले हैं जिससे इस मत को अधिक पुष्टि मिली है. जबकि कुछ अन्य लोगों का विश्वास है कि यह खजाना जरासंध का है. 

इस खजाने का दरवाजा आज तक कोई खोल नहीं पाया है ,गुफा की एक दीवार पर 'शंख लिपि में लिखा सीक्रेट कोड इस का पासवर्ड है.
खजाने के रहस्यमयी दरवाजे के ऊपर काला निशान दिखाई देगा जो कि तोप के गोले का है ,यह ब्रितानी हुकूमत में अंग्रेजी सरकार द्वारा इसे तोड़ने के प्रयास का एक प्रमाण है. 

पूर्वी गुफा कुछ नष्ट हो चुकी है.आगे का हिस्सा टूट चुका है.दक्षिणी दीवार पर ६ जैन तीर्थंकरों के चित्र भी खुदे हुए हैं.जो गुफा पूरी निर्मित होने के बाद अंकित किये गए माने जाते हैं. 

राजगीर बौद्ध धर्म का एक प्रसिद्ध तीर्थस्‍थल है. हिन्‍दू और जैन धर्म के कई मंदिर भी हैं.ज्ञात हो कि राजगीर के आस-पास की पहाडियों पर 26 जैन मंदिर बने हुए हैं.जहाँ पहुंचना आसान नहीं है. 

सोन गुफा के अतिरिक्त आप राजगीर में गृद्धकूट पहाड़ी, अजातशत्रु का किला-,पिप्‍पल गुफा[इसी गुफा में बौद्ध गुरु महाकश्‍यप कई बार ठहरे थे], वेणुवन, जीवककरम मठ, तपोधर्म, सप्‍तपर्णी गुफा, जरासंध का अखाड़ा, बिंबिसार का जेल, शांतिस्‍तूप,वैभव पहाड़ी के किनारे गर्म पानी का झरना आदि देख सकते हैं..

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