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Tuesday, 12 January 2016

खेती से दिनेश ने बदली 50 हजार किसानों की लाइफ, थाईलैंड-जापान मे लिया ट्रेनिंग

खेती से दिनेश ने बदली 50 हजार किसानों की लाइफ, थाईलैंड-जापान मे लिया ट्रेनिंग

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खेती को घाटे का काम कहने वाले मुजफ्फरपुर के 40 वर्षीय युवा किसान दिनेश की खेती देख चौक जाएंगे। खेती से मुंह मोड़ने वाले किसान फिर से नई ऊर्जा के साथ दिनेश की सलाह पर खेती कर 5 से 10 लाख रुपए तक लाभ कमा रहे हैं।
नई तकनीक से खेती शुरू की तो खुद के साथ लगभग 50 हजार किसानों की भी जिंदगी बदल दी। आज दिनेश को समाज में किसानों की जिंदगी बदलने वाला बड़ा चेंज एजेंट के रूप में देखा जा सकता है। बेहतर कार्य के लिए इन्हें कई पुरस्कार मिले हैं। अक्टूबर में बीज उत्पादन के लिए दिल्ली में केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री ने पुरस्कार दिया था।
मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली, मोतिहारी, बेगूसराय, कटिहार, खगड़िया और दरभंगा में दिनेश ने किसानों को समूह तैयार करवाया है, जो अलग-अलग फसल व सब्जी की खेती करते हैं। उत्पादन की बिक्री की व्यवस्था खुद दिनेश करा देते हैं। धान, गेहूं, फूलगोभी व आलू का बीज तैयार कर किसानों के साथ ही बिहार बीज निगम को भी देते हैं।
पहले खेती से जीवन गुजारना भी मुश्किल था, लेकिन जैविक और नई तकनीक से समेकित खेती करने लगे तो सालाना 5 से 10 लाख रुपए लाभ होने लगा है। दिनेश की आय तो इससे भी काफी अधिक है। सब्जी की खेती खास कर करैला की खेती में नए प्रयोग किया है। कृषि वैज्ञानिक जहां एक एकड़ में 920 करैला के पौधे लगाने की सलाह देते हैं, लेकिन दिनेश 2760 पौधे लगाते हैं।
इससे उन्हें दो से तीन गुना अधिक उत्पादन मिलता है। खेत में ही सात ऊंचा बांस जगह-जगह लगा कर इसमें तार बांध कर मचान बना देते हैं। इसमें करैला मचान के नीचे और ऊपर दोनों तरफ फलते हैं। करैला की इनकी खेती देख वैज्ञानिक भी चौक जाते हैं। करैला सब्जी और दवा दोनों के लिए राज्य से बाहर भेजते हैं। अभी खुद 135 एकड़ जमीन लीज पर लेकर खेती कर रहे हैं। अन्य किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाते हैं।
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थाईलैंड व जापान में लिया प्रशिक्षण 
1991 में मैट्रिक पास करने के बाद दिनेश की पढ़ाई में मन नहीं लगा। 1993 में वे हरियाणा चले गए। वहां लीज पर जमीन लेकर खेती करने करने लगे। केंद्र व हरियाणा सरकार ने इन्हें 2001 में जैविक खेती के प्रशिक्षण के लिए थाईलैंड भेजा।
 2004 में कृषि यांत्रिकीकरण प्रशिक्षण के लिए जापान भेजा, जहां 6 माह तक प्रशिक्षण लिया। फिर 2006 में बिहार अपने गांव लौट कर खेती शुरू की और अन्य किसानों को भी प्रोत्साहित करने लगे।
दिल्ली व नेपाल जाती है सब्जी
करैली, बैंगन और अन्य सब्जियों को दिनेश बिहार के अन्य जिलों में भेजने के साथ ही दिल्ली, झारखंड, पश्चिम बंगाल व नेपाल तक भेजते हैं। जैविक सब्जी रिलायंस फ्रेश को सप्लाई की जाती है। डायबिटीज की दवा बनाने के लिए हरियाणा की एक दवा कंपनी जैविक करैला लेती है।
दो लाख किसानों को जोड़ने की योजना
दिनेश बताते हैं बिहार के हर जिले में कम से कम दो लाख किसानों को सामूहिक खेती से जोड़ने की योजना है। इससे अधिक किसानों की आर्थिक हालात सुधरेंगे। अधिक से अधिक जैविक खेती का ध्यान देना है। जैविक खेती में जहां लागत कम होता है, वहीं खेत की उर्वरा भी बरकरार रहती है। इसके साथ ही जैविक उत्पाद का की कीमत भी अधिक मिलती है।
इन जिलों में दिनेश से जुड़े हैं किसान
मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली, मोतिहारी, बेगूसराय, कटिहार, खगड़िया और दरभंगा
यहां भेजते हैं सब्जी
बिहार के अन्य जिलों के साथ ही नेपाल, पश्चिम बंगाल, दिल्ली व झारखंड

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