बिहार जहाँ की आबोहवा से बुद्ध के ज्ञान की खुशबू आती है, बिहार जहाँ की पावन माटी ने गुरुगोबिंद सिंह जैसे वीरों को जन्म दिया है ! अशोक जैसा महान शासक,चाणक्य जैसा नीतिवान और महावीर जैसे दार्शनिकों की कर्मस्थली रहा है बिहार ! बिहार के महान बेटों ने भारतवर्ष की शरहदों से बाहर जाकर सनातन धर्म की,और लोकतंत्र की स्थापना की है ! लुटियंस पेश करते है “भारतवर्ष का गौरव,बिहार का स्वर्णिम इतिहास”

Monday, 11 January 2016

बिहार का परिचय

बिहार का परिचय

●एक झलक
अंग्रेजों द्वारा सन् १९१२ में बंगाल प्रांत से अलग होकर यह भूखंड बिहार प्रांत का नाम धारण किया यह भूखंड विश्व मानवता के अध्यात्मिक विकास का साक्षी रहा है.
इसके प्रमाण प्राचीन काल से चली आ रही जनश्रुतियों एवं पुराण, उपनिषद, जैन साहित्य, परिब्राजक और तिर्थकारों तथा आधुनिक लेखकों के साहित्य में भी उपलब्ध है ।
इतिहास के अध्येता जानते है कि प्राचीन काल से ज्ञात करुष, मगध, अंग, मिथिला, वैशाली, मल्ल, पुंड और विज्र का प्रभाव भारत के इतिहास में कितना है । कई शताब्दियों तक मगध का राजनैतिक प्रभाव एवं पाटलिपुत्र भारत के प्राचीन नगरों में अग्रणी रहा है । आज भी
‘गया’ भारत के सांस्कृतिक नगर के रुप में जाना जाता है।
१८५७ के महासमर में अंग्रेजों के विरूद्ध बिहार के भूमिका का किसको पता नही? बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व में बिहारवासियों ने जो संग्राम किया उसका आज तक कही मिसाल नही है। बिहार के गौरव महात्मा बुद्ध, तीर्थंकर महावीर, तीर्थंकर वासु, पूज्य संत दरियादास, बाबा रामेश्वर दास, बाबा धरनीधरदास, संतमेहीदास जनक, याज्ञवल्क्य, आचायी मिश्र, कर्ण, ध्रृस्टकेतु, चाणक्य, चन्द्रगुप्त, समुद्रगुप्त, डाक्टर राजेंद्र प्रसाद, डाक्टर श्री कृष्ण सिंह, डाक्टर अनुग्रह नारायन सिंह, जग जीवन राम, कर्पूरी ठाकुर, योगेन्द्र शुक्ल, बैकुंठ शुक्ल, बट्केश्वर दत, जयप्रकाश नारायण और बराह मिहिर ये सब इसी भूमि के ही तो उपज थे.

बिहार का इतिहास 3000 साल पुराना है । यहाँ मौजूद ऐतिहासिक स्मारक इस बात की गवाही देते हैं।

●नालंदा
ह्यूइन सैंग जब अपनी खोज पूरी कर के 10 साल बाद चीन वापस जा रहे थे तो उनके साथ दो छात्र भी थे। लेकिन नदी में बाढ़ आ गई और नाविक ने उनसे नाव का वज़न कम करने को कहा।
सैंग किताबें फेंकने को तैयार हो गए लेकिन छात्रों को ये नामंज़ूर था। इसलिए वे दोनों किताबों को बचाने के लिए खुद नदी में कूद गए और अपनी जान दे दी……… ये दोनो नालंदा विश्वविद्यालय के छात्र थे… और ऐसे थे उनके आदर्श…
नालन्दा विश्वविद्यालय दुनिया का सबसे पहला विश्वविद्यालय है जिसकी स्थापना मगध काल में हुई थी।
यहाँ देश विदेश के 10,000 छात्र शिक्षा पाते थे।

●बोध गया
गौतम बुद्ध को बोध गया में बोधिसत्व की प्राप्ति हई । इसलिए माना गया कि बौद्ध धर्म का जन्म बिहार में हुआ।
(महाबोधी मंदिर, बोधी वृक्ष, बोध गया)

अन्य पर्यटन स्थल

( यक्षिणि की मूर्ति, पटना संग्रहालय )
मौर्य काल में बनाई गई यक्षिणि की मूर्ति भारत पर यूनानी कला संस्कृति के प्रभाव का एक नमूना है । ये मूर्ति आज भी पटना म्यूज़ियम में सुरक्षित है।

( अशोक के बनाए स्तंभ, वैशाली )

( हरमंदिर साहिब, पटना )
सिक्खों के आखिरी गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म पटना में हुआ और यहीं उनका निर्वाण हुआ । पटना का हरमंदिर साहिब उन्हीं की याद में बनाया गया है जहाँ उनके स्मृति चिन्ह हैं।

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