बिहार जहाँ की आबोहवा से बुद्ध के ज्ञान की खुशबू आती है, बिहार जहाँ की पावन माटी ने गुरुगोबिंद सिंह जैसे वीरों को जन्म दिया है ! अशोक जैसा महान शासक,चाणक्य जैसा नीतिवान और महावीर जैसे दार्शनिकों की कर्मस्थली रहा है बिहार ! बिहार के महान बेटों ने भारतवर्ष की शरहदों से बाहर जाकर सनातन धर्म की,और लोकतंत्र की स्थापना की है ! लुटियंस पेश करते है “भारतवर्ष का गौरव,बिहार का स्वर्णिम इतिहास”

Tuesday, 26 January 2016

‘बिहारी’ शब्द से इतनी नफरत क्यों?

‘बिहारी’ शब्द से इतनी नफरत क्यों?

हमारा देश विविधताओं का देश है। जिसमें 121 करोड़ लोग रहते है, यह 121 करोड़ लोग अलग अलग भाषाओं और अलग अलग संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते है। लेकिन अक्सर ये देखा गया है कि बिहार में रहने वाले  या बिहार से आये लोगों के प्रति हम अक्सर तरह-तरह धारणाएं बना लेते है। आज हम इस पोस्ट के माध्यम से आपको यह बताना चाहते है कि आखिर क्यों बिहारी हम सबसे अलग होते हुए भी हम जैसे ही है-

1- “बिहारी एक अच्छे वक्ता नहीं होते  है” वो बंदूक की नोक पर लोगों से बात ना मनवा कर तर्कपूर्ण रूप से जीतते है-
ऐसे माना जाता है बिहारी अच्छे वक्ता नहीं होते है बल्कि एक अच्छा और बुद्धिमान बिहारी हमेशा खुली डिबेट के लिए तैयार रहता है। वह एक नियमित व संयमित रूप से तर्कपूर्ण बात करने में विश्वास करते है। अपनी बात को बिना किसी तर्क या बिना ज्ञान के बंदूक की नोक पर अपनी बात नहीं मनवाते है।


हां कई बार वो कॉमेडी में अपनी बात को इतने तर्कपूर्ण तरीके से बता जायेंगे कि आप सोचने पर विवश हो जायेगे। तो लड़कियों अगर आप अपने माता पिता से किसी बिहारी से शादी करने के बारें में बात करने जा रही है तो वो आपको कभी निराश तो नहीं करेगा।
2-

“बिहारी अपने लहजे में सुधार नहीं कर सकते” बल्कि उनकी बोली को दुनिया की सबसे मीठी बोली कहा जाता है-
भोजपुरी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली बोली है। जिसको मीठी बोली का भी दर्जा प्राप्त है। बिहारी 6 अलग अलग भाषाओं का प्रयोग करते है जिसमें मैथली, मगधी, भोजपुरी, बजिक्का, सांथली और अंगीका है। जिसमें से भोजपुरी और सांथली को राष्ट्रीय भाषाओं का दर्जा प्राप्त है। अगर पंजाबी, मराठी, गुजराती सब अपनी संस्कृति और भाषा को अपना कर चलते है तो बिहारियों से ही क्यों दिक्कत है भई आपको??


3- “तू लगाबेलु जब लिपिस्टिक” बिहारी सिर्फ भोजपुरी ही सुनते है, नहीं वो रॉक और क्लासिकल भी पसंद करते है-
हां ये सच है कि भोजपुरी गाने ऐसे होते है जो दोस्तो की महफिलों को गुलजार कर देते है पर इसका मतलब ये नहीं कि बिहारी सिर्फ भोजपुरी सांग ही सुनते है। बिहारी लोग काफी सभ्य होते है तो म्यूजिक में उनका टेस्ट भी काफी अच्छा होता है। बिहारी उर्दू शायरी और अच्छी लिरिक्स के सांग्स को ज्यादा तवज्जो देते है। और दूसरे लोगों की तरह वह भी रोमांटिक, सैड, क्लासिकल, रॉक, इंस्ट्रूमेंटल सांग सुनना पसंद करते है।वह अन्य भारतीयों की तरह बॉलिवुड और हॉलिवुड के सांग को उतना ही सुनते है जितना हर भारतीय। तो किसी बिहारी को सिर्फ गानों के लिए जज करना गलत है।


4- “बिहारी असंस्कारी और असभ्य होते है” जी नहीं बल्कि वह हाथ जोड़ने की जगह पैर छूना ज्यादा पसंद करते है-
अक्सर बिहारियों को अशिष्ट और असभ्य करार दिया जाता है पर आपको बता दें कि बिहारियों की सीख और शिक्षा कहीं अच्छी होती है। आज के बच्चों को सबके सामने बड़ो के पैर छूने में शर्म महसूस होती है वहीं बिहारी बिना किसी शर्म के पब्लिक प्लेस में बड़ों को आदर देने में पीछे नहीं हटते है। अगर आपके दोस्तों के ग्रुप में कोई बिहारी दोस्त है तो ऐसा आप देख ही चुके होंगे।


5- “बिहारियों में ड्रेसिंग सेन्स नहीं होता” नहीं बल्कि वो ट्रेडिशनल परिधान को पहनते है-
लोगों में यह सोच एक कॉमन होती है कि बिहारी बिल्कुल भी फैशनेबल नहीं होते है। लेकिन क्या छोटे कपड़े ही किसी की ड्रेसिंग सेन्स बताते है?या छोटे कपड़े, टाइट और वेर्स्टन कपड़े पहनना ही फैशनेबल होना है। अगर यहीं तक आपकी सोच है तो वह बिल्कुल गलत है। ज्यादातर बिहारी सिंपल और आरामदायक ट्रेडिशनल कपड़ो को पहनना पसंद करते है।


6- बिहारियों ने सारी सफेद कॉलरी नौकरी चोरी कर ली जी नहीं ये उनके मेहनत का फल है-
अक्सर एक और इल्जाम बिहारियों पर लगाया जाता है कि सभी अच्छी सरकारी और सफेद कॉलर की जॉब तो बिहारी छीन लेते है। भारत में अगर किसी को उनकी हार्डवर्किंग के लिए सबसे ज्यादा माना जाता है तो वह है बिहारी कम्यूनिटी।बिहारी अच्छे विघार्थी के लिए जाने जाते है जो देश की सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में अपनी प्रतिभा के बल पर राज करते है, चाहे वो आईएएस हो या आईआईटी सभी में बिहारियों का कब्जा होता है उनके ज्ञान की वजह से।

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