अधूरा इश्क़..!
आज की कहानी ” अधूरा इश्क़ “.. वैसे माने तो इश्क़ शब्द हमारे समाज को शर्मसार करने वाला शब्द भी है और बहोत बड़ा गुनाह भी इस बात को मैं इस लिए कह रहा हूँ की समाज में मैंने अक्सर यही सुना है.. हमारे समाज का मानना है की अपनों सभ्यता अपनी संस्कृति और खुद समाज इसकी इजाजत नहीं देती.. साफ साफ कहा जाये तो इश्क जैसा कुछ भी करना हमारे द्वारा समाज के प्रति गलत सन्देश देना होगा..
लोग कहते हैं बढ़ते जमाने में बच्चे बिगड़ रहे हैं समाज परिवार की परवाह नहीं करते, लाज हया जैसी कुछ नहीं रही, इश्क़ कर बैठते है और अपने संस्कृति समाज नियम की मज़ाक बना कर रख देते हैं.. – ऐसा समाज का कहना है..
कहानी पढ़ने से पहले कुछ सवाल मेरे तरफ से भी..
समाज कहती है इश्क़ करना संस्कृति नियम को चोट पहुचना होता है, होता होगा शायद.. क्योंकि मै भी २१ की उम्र से गुजर रहा हु मुझे नहीं लगता गलत..
शायद यह भी वजह होगी हमारी पीढ़ी हमारी उम्र ही नहीं है किसी भी चीज़ को गलत कहने की बस जो उम्र की सफर में आये बस उसके हो लिए- ऐसा अक्सर समाज कहता है..
जो समाज इश्क़ जैसे चीज़ को गुनाह मानता है वाही समाज रामायण,महाभारत, और श्री कृष्ण लीलाइ दिखाए गए प्रेम प्रसंग को बहुत गौर से देखता है.. और कभी नहीं भूलने तक याद करता है.. यहां तक की पुरुष के अगे स्त्री का नाम लेता है..” सीता-राम, राधे-कृष्ण “.. फिर वाही समाज आज किसी लड़की के प्रेम प्रसंग की ज़रा सी भनक भी लग जाये तो कुलक्षण, बच्चलन जैसे शब्दों से संबोधित करता है.. समाज ये मानता है की राम, कृष्ण भगवन थे उन्हें अधिकार था, उनका प्रेम प्रसंग एक लीला था, समाज के भले के लिए.. इस बात पर समाज से एक बात और कहना चाहूँगा.. चलिए मान लेते है वो भगवन है और उन्हें अधिकार है.. लेकिन हमे सिखाया गया है बताया गया है हर इंसान में भगवान का वाश है.. पहले आप अपने बेटे-बेटियों को भगवान का दर्ज़ा तो दीजिये.. फिर देखिये क्या गलत क्या सही हैं.. आपको बताते चलें की नवयुवकों में लगभग सत्तर प्रतिसत युवा आज नशे के गिरफ्त में है सबसे पहले लगने वाली नशा. सिगरेट का होंता है.. ऐसा भी माना जाता है की सिगरेट डिप्रेशन(तनाव) से मुक्त होंने का सबसे बढ़िया उपाय है , शायद यह एक भ्रम हो युवाओं की.. लेकिन ये सच है युवाओं के हिसाब से जानते है क्यों…?
चलिए एक कहानी सुनिए, इश्क़ की, समाज की और कुछ गलतियों की….
” आज लड़की की इंगेजमेंट है लड़की का घर फूलो से सजा हुआ है चारो तरफ ख़ुशी का माहौल है। लड़के ने अभी अभी नौकरी के लिए परीक्षा पास किया है, लड़के को एक अछि नौकरी बी नौकरी भी हासिल हो गयी है फिर भी उदास है लड़का अब नहीं चाहता करना नौकरी.. लड़के को समय की कमियां खल रही हैं, लड़के को ये समाज काटने को दौड़ रही हैं..
लड़का इधर दूसरे शहर में बेसुध टहल रहा है, हाथ में सिगरेट लिए.. फूंकते हुए..रोते हुए…
सारे कसमे सारे वादे आज झूठे सिद्ध हो गए। कुसूर तो दोनों का है सबसे बड़ा कसूर है ब्राह्मण, कायस्थ, क्षत्रिय घर में पैदा होना। अलग जात बिरादरी में पैदा होना। दूसरा प्रेम होना।। लड़का खुद को अपने परिवार और लड़की की इज्जत को ले और खुद को मज़बूर बोल के समझाने की कोशिश करता है पर ये एक बहाना मात्र है..
ये वो लड़की है जिसके लिए वो अपने दोस्तों से झगडे कर लेता था जिसकी सम्मान के लिए लड़का जान तक हाज़िर रखता था। लड़का इश्क़ से पहले आवारो में गिना जाता था.. पढाई में वैसे भी मन का नही लगना लगभग 80% लड़कों की खामियां हैं,
उसे आज सब याद आरहा है। हर वो दिन जब वो सुबह सोता रहता था और वो आजाती थी बच्चों जैसी मुस्कराहट लिए हुए। जहन्नुम जैसे घर को स्वर्ग बना देती थी।
“तुम्हारा एक भी सामान सही जगह नहीं रहता”
“नहीं यार इधर टाइम नहीं मिल पाया, exams है न पढाई करने में समय का पता ही नही चलता..
“अच्छा जी पढ़ने में कब से मन लगाने लगे जनाब..”
जब से इश्क़ जैसा कुछ हुआ है, सुनो ये पढ़ाई वढ़ाई भी बस तुम्हारे लिए करता हूँ.. ताकि एक बढ़िया नौकरी पा सकूँ.. नहीं तो तुम्हारे पापा के सामने क्या मुहं ले कर जाउंगा ”
“ हे हे तुम भी न, हाँ सब जानती हूँ मैं और कपड़े सब फेके रहते हो,बर्तन कबसे नहीं धुले?”
“अरे बस अभी सब हो जायेगा तुम बैठो मैं दूध ले आता हूँ”
लड़का दूध और डेरी मिल्क चॉक्लेट लेके आता है और इधर कपडे सरे तह होके आलमारी पे रखे हुए है और वो बर्तन मांज रही है।
“अबे पागल हो का तुम? चलो बैठो ये चॉक्लेट खाओ हम चाय बनाते हैं। ”
“तुम्हे मालूम है न डेरी मिल्क मेरी फेवरेट है”
“नहीं तो इसे तो अपने लिए लाये थे।”
“लो मरो हुँह”
“हा हा हा लव यू”
“(लड़के का पर्स टटोलते हुए) सुनो कुछ पैसे चाहिए..”
“कितने?”
“तुम्हारे पास तो यही 160 ₹ हैं? हमे तो 2000 चाहिए”
“ठीक है परसो लेलेना हो जायेगा”
“ठीक लव यू टू ”
बात चीत में घंटो बीत गए
“ओये 2 बज गए अब मुझे जाना है कॉलेज की छुट्टी टाइम हो गया है”
“मत जाओ बाबू”
“चल भाग”
“हा हा हा”
“खाना खा लेना बाय ”
लड़का उसे रिक्शे पे बैठा के घर के लिए लौटता है।
किराने की दुकान पर maggi खरीदने जाता है और पर्स से निकलता है..
उसकी आँखे नम हो जाती हैं 500 की दो नोट पड़ी रहती है। वो जानती थी के लड़के के पास पैसे नहीं थे…
लेकिन इस दौर को गुज़रे 3 साल हो चुके है। वो स्वर्ग जैसा कमरा। अब तो वो गलिया भी नर्क का रास्ता लगती हैं लड़के को लड़का नौकरी कर रहा होता है नहीं चाहते हुए भी.. बस अपने परिवार के लिए.. फिर भी लड़के के परिवार में एक नाराजगी है लड़के के प्रति.. लड़का शादी नहीं करना चाहता
. लड़का सरे वादे तोड़ने के बाद भी एक वादा पूरा करना चाहता है, ये वादा लड़के ने लड़की से कर रखा था.. इस वादे को पूरा करने का पूरा अधिकार और ताकत था लड़के में और समय भी, इस वादे के बिच कोई समाज कोई जात बिरादरी कोई नियम रुकावट का काम नहीं करती..
लड़का अब सिगरेट से ज्यादा सराबी हो गया है.. लड़के के परिवार को इस बात की भनक भी नहीं.. लड़की रहती थी तो दोस्तों के साथ एक दो काश लेने पर भी डांट देती थी.. क्योंकि लड़का हर बात बताया करता था उसे.. वो भी बातें जो शायद लड़का कभी खुद से भी नहीं कह पता. वो लड़की से केह जाता था.. अब लड़की नहीं है सुनने को समाज और नियम ने अनुमति नहीं दी लड़के और लड़के के साथ रहने की क्योंकि बिरादरी अलग थी.. हमारे समाज में इंसानियत से पहले जात-पात बिरादरी आते हैं..” (ये कहानी शुभम श्रीवास्तव जी की है, हमने थोडा और बढ़ा के लिखा )
कहानी कैसी लगी मैं तो इसे सबसे पवित्र रिश्ता केह सकता हूँ.. यक़ीनन
कहानी शायद समाज को अच्छी नहीं लगी हो.. जिसे अछि नहीं लगी हो उससे एक बात कहना चाहूँगा.. वो अपने बेटे बेटियों को आज के दौर में “A,B,C,D और क,ख,ग,घ से पहले ये बताये की बेटा इश्क़ गलत है.. और इस बात को उसके दिमाग में रोज भरें ताकि समाज के नजरिये से वो कभी गलत न करे, और समाज को बोलने का मौका न मिले आखिर बच्चे तो आपके हैं समाज नियम और जात पात के नही.. क्या आप कभी देखना चाहेंगे अपने बच्चों को इस लड़के की तरह.. और हाँ मुझे लगता है लड़की को भी याद आती होगी लड़के से कहीं ज्यदा, सोचती होगी बर्तन, दो हज़ार रूपये, डेरी मिल्क चोकलेट और बस एक लड़की के लिए पढ़ने लग जाना एक लड़के का..

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